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ग्रहों की सम्पूर्ण जानकारी

ग्रह (Planets):

➡ यह सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हैं।
➡दीर्घ वृत्ताकार पथ में चक्कर लगाते हैं। इस पथ को कक्ष कहते है।
➡ ग्रह दो प्रकार की गति करते हैं जब अपनी अक्ष के चारों और गति करते हैं तो उसे घूर्णन गति कहते हैं तथा जब सूर्य के चारों ओर गति करते हैं तो उसे परिक्रमण गति कहते हैं।
➡ इनका अपना कोई प्रकाश और तापमान नहीं होता है यह सूर्य के ताप से चमकते हैं।
➡ वर्तमान में कुल ग्रहों की संख्या

विधुत चुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction)

विधुत चुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction):

विद्युतचुम्बकीय प्रेरण के सिद्धान्त की खोज माइकल फैराडे ने सन् 1831 में की थी।
जब किसी चालक कुंडली तथा चुम्बक के बीच सापेक्ष गति कराई जाती है तो कुंडली मे विधुत वाहक बल उत्पन्न हो जाता है, जिसे प्रेरित विधुत वाहक बल कहते है। इस प्रेरित विधुत वाहक बल के कारण

तापमान पैमाने (Temperature Scales)

तापमान पैमाने (Temperature Scales):
किसी भी पैमाने के द्वारा तापमान के मापन के लिए दो बिंदुओं की आवश्यकता होती है।
इनमे से एक बिंदु  जल का हिमांक होता है जिसे बर्फ बिंदु (Ice point) कहते है, तथा दूसरा बिंदु जल का क्वथनांक होता है जिसे भाप बिंदु (steam point) कहते है।

तापमान पैमाने मुख्यतः 5 प्रकार के होते है-
  1. सेल्सियस या सेंटीग्रेड पैमाना: इसका आविष्कार स्वीडन के वैज्ञानिक

संख्या पद्धति (Number system) तथा इनका एक दूसरे में बदलने का तरीका

संख्या पद्धति (Number system):

संख्याओं को लिखने एवं उनके नामकरण के सुव्यवस्थित नियमों को संख्या पद्धति (Number system) कहते हैं।
ये निम्न प्रकार की होती है-
  1. दशमलव सँख्या पद्धति (Decimal number system) 
  2. द्विआधारी सँख्या पद्धति (Binary number system) 
  3. अष्टाधारी  सँख्या पद्धति (Octal number system) 
  4. षोड़ाधारी सँख्या पद्धति (Hexadecimal number system)

1) दशमलव सँख्या पद्धति (Decimal number system): 

दशमलव पद्धति  या "base ten"  वह संख्या पद्धति है जिसमें गिनती/गणना के लिये कुल दस संख्याओं (0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9) का उपयोग किया जाता है।
उदाहरण (1) 472 को निम्न रूप से दर्शाया जा सकता है-
4×102 + 7×101 +2×100
उदाहरण (2)

ट्रांसफॉर्मर (Transformer)

ट्रांसफॉर्मर (Transformer):

ट्रांसफॉर्मर

  • ट्रांसफार्मर का अविष्कार माइकल फैराडे तथा  जोसेफ हेनरी ने किया था।
  • ट्रांसफार्मर एक ऐसा स्थिर विद्युत यन्त्र है जो

चुम्बकत्व (Magnetism)

चुम्बकत्व (Magnetism): किसी वस्तु का वह गुण जिससे वह दूसरी वस्तु को अपनी ओर आकर्षित या प्रतिकर्षित करती है, उसे चुम्बकत्व कहते है। जैसे कोबाल्ट, स्टील, निकैल द्वारा लोहे को अपनी ओर आकर्षित किया जाता है।

चुम्बकीय क्षेत्र (Magnetic Field)

चुम्बकीय क्षेत्र (Magnetic Field): किसी चुम्बक के चारो ओर का वह क्षेत्र जहाँ तक उसका प्रभाव अनुभव किया जाता है, उस चुम्बक का चुम्बकीय क्षेत्र कहलाता है। इसे B से प्रर्दर्शित किया जाता है।

विधुत विभव और विभवांतर

विधुत विभव और विभवांतर: 

विधुत विभव (Electric Potential): एकांक आवेश को अनंत से विधुत क्षेत्र के किसी निश्चित बिंदु तक लाने में किया गया कार्य ही विधुत विभव कहलाता है।

विभव V= W/Q

p-n सन्धि डायोड (p-n Junction Diode)

p-n सन्धि डायोड (p-n Junction Diode): 
जब p -प्रकार के अर्धचालक को n-प्रकार के अर्धचालक से एक विशेष विधि द्वारा जोड़ा जाता है तो इस प्रकार जहाँ दोनो क्रिस्टल आपस मे

गति

गति(motion) : यदि किसी वस्तु की स्थिति में समय के साथ परिवर्तन हो रहा है तो वस्तु गति अवस्था मे कहलाती है।
ये 3 प्रकार की होती है-
1) सरल रेखीय गति : कण सरल रेखा में गतिशिल होगा।
2) वृर्तीय या घूर्णन गति : कण वार्ताकार मार्ग में गतिशिल होगा।

प्रतिरोध

प्रतिरोध : किसी भी पदार्थ का वह गुण जिसके कारण , उसमे प्रवाहित आयनों की गति में अवरोध उत्पन्न होता है, उसे पदार्थ का प्रतिरोध कहते है।
इसे R से प्रदर्शित करते है । इसका SI मात्रक 'ओम' होता है।

विधुत: एक परिचय

परिभाषा: आवेश के प्रवाह की दर को विधुत धारा कहते है।
यदि आवेश धनात्मक है तो विधुत धारा की दिशा आवेश की गति की दिशा में ही होगी, और  यदि

वैज्ञानिक यन्त्र व उनके उपयोग

मुख्य वैज्ञानिक यंत्र व उनके उपयोग
1) अल्टीमीटर- विमान की ऊँचाई मापने में
2) अमीटर- विधुत धारा के मापन में
3) बैरोमीटर- वायुमण्डलीय दाब नापने में
4) कैलोरीमीटर- ऊष्मा की मात्रा मापने में
5) डायनेमोमीटर- इंजन द्वारा उत्पन शक्ति नापने में
6) फेदोमीटर